नई योजना की चकाचौंध में दम तोड़ती पुरानी योजना, छत्तीसगढ़ में मनरेगा का करोड़ों का भुगतान लंबित

 

 

 

 

सक्ती: देश भर में 1 जुलाई 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को बंद कर उसके स्थान पर एक नई ऐतिहासिक व्यवस्था “विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन” (वीबी-जी राम जी एक्ट) को लागू कर दिया गया है। केंद्र और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस नई योजना के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, जिसमें मजदूरों की दिहाड़ी ₹261 से बढ़ाकर ₹300 करने और 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की बात कही गई है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक कड़वी सच्चाई यह है कि राज्य के कई पंचायतों में पुरानी मनरेगा योजना के तहत मजदूरी भुगतान तो कर दिया गया है परंतु कार्य में प्रयुक्त सामाग्री जो लगाई गई है उस सामग्री का भुगतान लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ है, जिस पर छत्तीसगढ़ शासन ध्यान नहीं दे रही है।

 

नई योजना का स्वागत, पर पुराने हक़ का क्या?

 

नियमों के मुताबिक, विकसित भारत जी राम जी (VB-G RAM G) योजना के तहत ग्रामीण विकास के लिए करोड़ों रुपये का अंतरिम आवंटन तो किया गया है, लेकिन ग्राम पंचायतों में पूर्व में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की सामग्री का भुगतान अधर में लटका हुआ है। कई जिलों में फंड की अनुपलब्धता या प्रशासनिक उदासीनता के कारण पुरानी फाइलें बंद होने की कगार पर हैं, जिससे दीपावली और त्योहारों के इस सीजन में कई घरों में मायूसी छाई हुई है। चूंकि कार्य की जिम्मेदारी सरपंचों के ऊपर रहती है इसलिए सरपंच बाजार से अपनी जिम्मेदारी पर सामग्री क्रय करते हैं जिसका भुगतान भी उन्हीं को करना पड़ता है। सरपंचों का कहना है कि हमने बाजार से उधार लेकर कार्य संपन्न करा दिया है मगर हमको शासन के द्वारा अभी तक सामाग्री के बिल का भुगतान नहीं किया गया है। त्योहार के इस समय व्यापारी घर पर आकर पूरे गांव के सामने तकादा मार रहे हैं जिससे अप्रिय स्थिति निर्मित हो रही है।

 

शासन की अनदेखी से आक्रोश

 

ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही खबरों के मुताबिक, ग्राम पंचायतों के अधिकारियों का कहना है कि सरकार नई योजना के तहत 7 से 15 दिनों के भीतर सीधे बैंक खातों में भुगतान और देरी होने पर अतिरिक्त ब्याज या बेरोजगारी भत्ता देने का वादा कर रही है, जो कि कागजों और भाषणों में बहुत आकर्षक है। परंतु हकीकत यह है कि उनके पुराने पसीने की कमाई तथा भुगतान महीनों से शासन के पास अटकी हुई है। इस गंभीर विषय पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि छत्तीसगढ़ शासन नई योजना का ढिंढोरा पीटने में इतनी व्यस्त है कि उसे लंबित भुगतानों को क्लियर करने की सुध ही नहीं है।

 

अधर में लटके निर्माण कार्य

 

भुगतान न होने के कारण पंचायत स्तर पर पूर्व में स्वीकृत तालाब गहरीकरण, सुदूर सड़क और कूप निर्माण जैसी कई पुरानी बुनियादी ढांचा योजनाएं भी बीच में ही रुक गई हैं। सरपंचों और रोजगार सहायकों का कहना है कि जब तक पुराना बकाया नहीं मिलेगा, तब तक गांवों में नई ‘जी राम जी योजना’ को सुचारू रूप से धरातल पर उतारना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

 

अब देखना यह होगा कि छत्तीसगढ़ शासन कब नींद से जागती है और इन गरीब मजदूरों के हक का लंबित भुगतान कर उन्हें राहत पहुंचाती है।

Live Share Market

जवाब जरूर दे 

क्या सक्ती जिला अपनी आशानुरूप जिला स्तर का स्वरूप प्राप्त कर रहा है ??

View Results

Loading ... Loading ...

Related Articles

Back to top button
.
Website Design By Bootalpha.com +91 8448265129
.
Close