
हाल ए सक्ती,,,विकास की राह तकता सक्ती,, नेतागण मस्त आम जनता त्रस्त,,,,,

सक्ती : वर्ष 2025 के विदाई और नववर्ष के अभिनंदन का आज दिन है। मगर सक्ती को 2025 में क्या कुछ विशेष दर्जा मिल पाया। यदि अन्य क्षेत्रों की से तुलनात्मक अध्ययन करें तो हम पाएंगे कि सक्ती जिले को कुछ खास उपलब्धि हासिल नहीं हुई है।
यह कटु सत्य है और सर्वविदित है कि सक्ती ने 2025 में कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं किया है। सिर्फ़ फोटोबाजी पोस्टरबाजी और हवाहवाई बातों में ही साल गुजर गया। पूरे सक्ती का विकास सोशल मीडिया में ही दिखाई दे रहा है और धरातल पर जीरो बटे सन्नाटा नजर आ रहा है, सिर्फ कागजों में फाइलों में ही विकास की राजनीति चल रही है धरातल में लोग परेशान हैं।
नगर में बीते वर्ष कई आयोजन हुए जिसमें वर्तमान सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री के साथ कई नेताओं का आगमन सक्ती क्षेत्र में हुवा, सरकार के खजाने से लाखों रुपए खर्च कर कार्यक्रमों का संचालन किया गया। वर्तमान परिस्थितियों में जिला प्रशासन हर सप्ताह विभागीय बैठक, समीक्षा बैठक कर रहा है और मजे की बात तो यह है कि समस्या निवारण हेतु लोगों से आवेदन भी लिया जा रहा है मगर हाय रे सक्ती की फूटी किस्मत, मजाल है कि किसी समस्या का निदान हो जाए।
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को घटिया चावल मिल रहा है लगातार शिकायत हो रही है मगर नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह प्रशासन तक शिकायतकर्ता की आवाज नहीं पहुंच पा रही है और घटिया चावल वितरण की चर्चा ही नहीं हो पा रही है।
किसानों के धान खरीदी की व्यवस्था में भी भारी झोल नजर आ रहा है ऑनलाइन के चक्कर में किसान परेशान हैं उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। धान खरीदी की मात्रा हर जिले में बढ़ गई है मगर सक्ती जिले में मजाल है कि बढ़ जाए। क्षेत्र में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं पुलिस का ख़ौफ़ अपराधियों में कम होता जा रहा है।
रेल्वे स्टेशन की हालत किसी से छुपी नहीं है आम जनता त्रस्त है, ना कोई जन सुविधाओं में वृद्धि हुई है और ना ही किसी ट्रेन का स्टॉपेज मिल पाया है समस्या जस की तस है। करेला ऊपर से नीम चढ़ा की तर्ज पर एक तो जिला मुख्यालय जेठा में है ऊपर से वहां पर टोल प्लाजा स्थापित है जो की सक्ती वासियों के लिए सरदर्द बन गया है।
टोल प्लाजा के मामले में केंद्र में भाजपा सरकार होने के बाद भी भाजपा सांसद के पहल का कोई असर नहीं हो रहा है यह सक्ती क्षेत्र की जनता के लिए दुख का विषय है।
सक्ती में राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो दोनों पार्टियां सिर्फ फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया में ही अपनी राजनीति चमकाने तक सीमित दिख रही हैं क्षेत्र विकास के लिए दोनों ही पार्टियों में गंभीरता का अभाव दिख रहा है।
आमजन परेशान है किसी भी पार्टियों के नेताओं को आम जनता की परेशानी से कोई लेना देना नहीं है। वर्तमान स्थिति में ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा जरूर मजबूत दिखाई दे रही है वहीं काग्रेसियों का कोई सुध लेने वाला भी नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में जिले में कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर दिखाई दे रही है। कई बड़े कार्यक्रमों में पूर्व जिला अध्यक्ष सहित कई कट्टर समर्थक नजर नहीं आ रहे हैं। यह तो डॉ महंत का कांग्रेसी समर्थक नेताओं में डर बना हुवा है जिससे गुटबाजी उभर कर सामने नहीं आ पा रही है वरना तो कब गुटबाजी किस स्तर तक चली जाए कोई कह नहीं सकता।
कुछ दिनों पूर्व ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष के चुनाव में गुटबाजी खुलकर सामने आयी और दिल्ली से आये पर्यवेक्षक के सामने भी गुटबाजी और पक्षपातपूर्ण रवैया नजर आया जिससे जिलाध्यक्ष का पद विधानसभा क्षेत्र सक्ती से बाहर चला गया। आज भले ही विधानसभा चुनाव तीन साल बाद हैं लेकिन जिले में विपक्षी पार्टी कांग्रेस के हालात ठीक नहीं है।
रही बात भाजपा की तो प्रदेश में भाजपा की सरकार है इसलिए जिला प्रशासन में भाजपा पदाधिकारियों की तूती बोल रही है मगर इससे भी क्षेत्र की जनता को कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा है।
आगे 2027 में यदि परिसीमन हो गया तो सक्ती विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी इस लिहाज से दोनों दल के छोटे बड़े नेता चुनाव लड़ने की तैयारी में अभी से लगे हुए हैं और अपनी जमीन तलाश रहे हैं।



