बाराद्वार तहसील क्षेत्र में राजस्व विभाग की मिलीभगत से लाखों का वारा-न्यारा

राजस्व विभाग की सांठगांठ से हुई लाखों रुपए की राजस्व हानि

 

 

 

बाराद्वार: बाराद्वार तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खूंटादहरा में बिना मुरूम क्षेत्र घोषित हुए ही राजस्व विभाग द्वारा शासन को लाखों रुपए का राजस्व हानि कर अवैध उत्खनन कर हजारों ट्रीप मुरूम एन एच आई के ठेकेदार को बेचा गया जिसमें ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर बड़े अधिकारियों तक की अनुमति थी। यह बात हम इसलिए लिख सकते हैं की सभी की सहमति के बिना इतनी मात्रा में मुरूम की खुदाई समतल भूमि से कैसे हो सकती है।

 

 

सूत्र बता रहे हैं कि इस प्रकरण का सबसे रोचक तथ्य यह है कि ग्राम पंचायत खूंटादहरा के द्वारा उसी अवैध उत्खनन से हुए गड्डे को पाटने के लिए फ्लाई ऐश का उपयोग हेतु एन ओ सी जारी किया गया है।

 

जहां कलेक्टर,एस डी एम, तहसीलदार अवैध राखड़ का केस बनाकर बहुत ही बड़ी कार्रवाई कर रहे हैं ऐसे में कलेक्टर कार्यालय के बगल एवं एसपी कार्यालय के पीछे का कारनामा भी सामने आना चाहिए। यह कारनामा एक बड़े पूर्व अधिकारी के द्वारा किया गया है जिसके बारे हमें मिली जानकारी के अनुसार इसमें मौखिक आदेश दिया गया था कि समतल भूमि जो की मुरूम क्षेत्र घोषित भी नहीं है वहां से मुरूम निकालने हेतु पंचायत का प्रस्ताव पास करो और मुरुम की खुदाई करो,यह जानकारी हमें नाम ना बताने के शर्त पर एक वार्ड पंच ने दी है।

 

शासन के रिकार्ड में जो क्षेत्र मुरूम उत्खनन के लिए चिंहित नहीं है वहां से कैसे हजारों ट्रीप मुरूम का उत्खनन कर तालाब नुमा बना दिया गया है जिसे अब हो सकता है कि मनरेगा से तालाब गहरी करण के तहत शासन को चूना लगाया जाएगा। जबकि शासन को अब तक इस मुरूम के मामले में लगभग करोड़ रुपए का चूना लग चुका है। वहीं हो सकता है कि अब राखड़ पाटकर भी लाभ सरपंच को मिलेगा।

 

अब देखने वाली बात यह है कि वर्तमान जिलाधीश महोदय अब इस पर क्या कार्रवाई करते हैं और शासन को हुए लाखों रुपयों की हानि की भरपाई कब और कैसे करते हैं साथ ही दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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