नवनिर्मित दुकानों की नीलामी में हुआ षड्यंत्र, रक्षक ही बने भक्षक, नगर पालिका को जानबूझकर लगाया लाखों का चूना

सक्ती: नगर पालिका सक्ती द्वारा निर्मित सियान सदन के दुकानों की नीलामी को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है। नीलामी की कार्रवाई कुछ इस तरीके से प्रायोजित की गई जिससे व्यक्ति विशेष को ही लाभ मिल सके। जब रक्षक ही भक्षक बन जाते हैं तो इसी प्रकार का कृत्य किया जाता है।

 

 

किसी भी स्थानीय निकाय के द्वारा हमेशा यही प्रयास किया जाता है कि उसकी आमदनी कैसे बढ़े और उसके लिए हर प्रकार के जतन किए जाते हैं। मगर अपने आप में अजूबा एक सक्ती नगरपालिका ही है जिसके द्वारा पालिका का फायदा छोड़ व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाया गया है। नियम कानून की आड़ लेकर तथाकथित नेता जी को परोक्ष रूप से दुकान कम कीमत पर दिलाने का जतन किया गया है।

 

एक दुकान 27 लाख में नीलाम होती है, तो उसके बगल की दुकान 6 लाख 75 हजार में नीलाम होती है. अगल बगल दुकानों में इतनी बड़ी राशि के अंतर से साफ दिखता है कि पूरी नीलामी प्रक्रिया को पहले से ही सेट किया गया है।

 

नीलामी के दौरान नियमों शर्तों की आड़ में अवैध नीलामी को वैध करने का प्रयास किया गया। आरक्षण में दस्तावेजों को लेकर जानकारी छिपाने की बात सामने आई और नीलामी के ठीक पूर्व कई लोगों का आवेदन नियम विरुद्ध निरस्त कर दिया गया।

 

नीलामी के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें नीलामी में मोहरा बनकर बैठे एक युवक ने नीलामी को लेकर बड़ा खुलासा किया है. वीडियो में युवक बता रहा है कि कैसे उसको एक मोहरा बनाकर बैठाया गया था, ताकि दुकान प्रायोजित तरीके से नेता जी एवं उनके आदमी को मिल जाए।

 

वायरल वीडियो में शख्स कह रहा है कि उसे मोहरा बनाकर पेश किया गया था, इसके एवज में उसे 1 लाख 25 हजार मिला है। नियमतः इस वीडियो में जो शख्स दिख रहा है उसकी जानकारी लेकर उससे पूछताछ की जानी चाहिए कि आखिर कौन है जो इस प्रकार से नगरपालिका को क्षति पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

 

 

नगर पालिका की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ तो स्थानीय विधायक डॉ महंत से प्राप्त पानी के टैंकर में लगी उनकी क्षतिग्रस्त तस्वीर को बदलना नगरपालिका को भारी पड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ पालिका के जिम्मेदारों के द्वारा अपना निजी हित साधना यह दर्शाता है कि इनका मकसद जनसेवा नहीं बल्कि नगरपालिका को चूना लगाना ही है।

यक्ष प्रश्न ????

यदि दुकान की नीलामी की राशि में लाखों रुपयों का अंतर आ रहा था तो नीलामी प्रक्रिया को रोककर पुनः अवसर प्रदान करते हुए अन्य दावेदारों को भी दोबारा क्यों नहीं शामिल कराया गया। किसको लाभ पहुंचाने के लिए नीलामी कार्रवाई पूर्ण की गई????

 

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क्या सक्ती जिला अपनी आशानुरूप जिला स्तर का स्वरूप प्राप्त कर रहा है ??

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