
विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर असहमति
रायपुर: राज्यपाल अनुसुइया उइके छत्तीसगढ़ सरकार के विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के प्रावधानों से सहमत नहीं हैं । राज्यपाल ने इस बाबत कुछ बिन्दुओं पर सरकार से स्पस्टीकरण मांगा था जिसके अध्ययन के बाद विधेयक को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने का फैसला किया है। विधेयक को मंजूरी नहीं मिलने से वर्तमान में पांच विश्वविद्यालयों में कुलपति की चयन प्रक्रिया अटक गई है।
विगत दिनों सरकार के चार मंत्रीयों ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की थी और विधानसभा में पारित लंबित पांच विधेयकों को मंजूरी देने का आग्रह किया था। इन विधेयकों में दो उच्च शिक्षा विभाग के हैं। जिसमें विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर असहमति बन रही है।
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने कुछ बिन्दुओं पर उच्च शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी। विभाग की तरफ से जवाब भेज दिया गया था। जवाब भेजे जाने के बाद भी उक्त विधेयक को मंजूरी नहीं मिलने पर मंत्रियों ने राज्यपाल से चर्चा की थी। बताया गया कि चर्चा में राज्यपाल ने उन्हें बताया कि विधेयक के प्रावधानों को लेकर यूजीसी से अभिमत लिया जाएगा और फिर विधेयक को राष्ट्रपति को भी भेज सकती हैं।

प्रदेश के मंत्रियों ने उन्हें विधेयक के प्रावधानों पर सहमत करने की कोशिश की कि प्रस्तुत विधेयक में नया कुछ भी नहीं है। अन्य राज्य में भी राज्य सरकार ऐसा कर चुकी है।
वर्तमान में अंबिकापुर विवि में कुलपति का कार्यकाल खत्म हो जाने के कारण वहां कमिश्नर कुलपति के प्रभार पर हैं। खैरागढ़ संगीत विवि में भी कुलपति की नियुक्ति अभी होनी है। उद्यानिकी विवि और नंदकुमार पटेल विवि में भी कुलपति की नियुक्ति की जानी है। प्रदत्त शक्तियों के अनुसार राज्यपाल के पास विशेष परिस्थितियों में विधेयक को राष्ट्रपति को भेजने का अधिकार है। चूंकि अब राज्यपाल ने विधेयक को राष्ट्रपति को भेजने का फैसला लिया है तो इन नियुक्तियों में समय लग सकता है।
काम के अपने विशेष अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली राज्यपाल अनुसुइया उइके ने विश्वविद्यालय संसोधन विधेयक को मंजूरी नहीं दिए जाने के मामले में मंत्रियों से कहा कि इस विधेयक पर 20 अप्रैल को विधेयक के संदर्भ में कुछ जानकारी मांगी गई थी लेकिन स्पष्टीकरण कुछ दिन पहले ही मुझको प्राप्त हुआ है । उन्होंने कहा कि यूजीसी और दूसरे राज्यों की प्रणाली का अध्ययन और विशेषज्ञों से बात करने के बाद ही मैं इस पर विचार करूंगी ।
विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है । इस पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विधेयक पर हस्ताक्षर करने के लिए राज्यपाल अनुसुईया उईके पर दबाव बनाने की प्रदेश सरकार की कोशिशों को घोर अलोकतांत्रिक, असंसदीय और असंवैधानिक बताते हुए इसकी निंदा की है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में न तो राजनीतिक समझ–बूझ है, न ही प्रशासनिक क्षमता दिख रही है, और अब वह राज्यपाल पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाकर एक बार फिर संघीय ढाँचे व संवैधानिक प्रक्रिया का खुला अपमान करने पर उतारू हो गई है ।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अब तक का कार्यकाल देश के संघीय ढाँचे की अवहेलना और प्राय: हर नाजुक मौकों पर संवैधानिक प्रक्रिया को चुनौती देने में ही जाया हुआ है. अपनी सरकार की सारी शक्तियां ख़ुद में केंद्रित करके मुख्यमंत्री जिस तरह का वन मैन शो चला और चलाना चाह रहे हैं, वह उनकी लोकतंत्र में गहरी अनास्था का परिचायक तो है ही, अब राज्यपाल के अधिकार छीनने की यह कोशिश उनके घोर असंवैधानिक आचरण का प्रदर्शन है।



